भारत में नगरीकरण की प्राकृतिक एवं प्रतिरूप का वर्णन कीजिए Bharat mein nagrikaran ki prakrutik AVN
November 05, 2023
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भारत में नगरीकरण की प्राकृतिक भारत में नागरिक विकास का एक लंबाई इतिहास है ई
से 2000 वर्ष पूर्व सिंधु घाटी में मोहन जो दारू और हड़प्पा जैसे सुनामी आयोजित ढंग
से बसाए गए नगर विकसित अवस्था में थे सिंधु घाटी सभ्यता के कथन के साथ ही नागरिक
सभ्यता का भी पतन हो गया था इसके पश्चात अर्थात सभ्यता के विकसित होने पर तक्षशिला
और इंद्रप्रस्थ जैसे विशाल नगरों का उदय हुआ जिसकी उत्पत्ति संभव होता है महाभारत
काल के पूर्व हुई थी भारत के प्रगति हसीन नागरिकों में मथुरा काशी प्रयाग अयोध्या
आदि देश के महान तीर्थ स्थल थे प्राचीन काल 700 ईसा पूर्व से 12 00 ईसा पूर्व तक
में नागरिक विकास राजधानियां का संस्कृत दुर्गा या घाटो तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक
केदो के रूप में हुआ प्राचीन काल में कौशिक की संकेत अयोध्या देश के विशाल नगर थे
मगध साम्राज्य की राजधानी के रूप में पत्र की पूर्व भी एक निषाद नगर बन गया था उसे
कल में विकसित अन्य नगरों में श्रीवास्तव वैशाली उज्जैन राजनगर अयोध्या दक्षिण सेल
काशी श्रीनगर जलधारा चित्र पांडे आज प्रमुख थे साध्वी शताब्दी के पंचायत राजपूत
राजाओं ने राजधानी तथा दुर्गा नगर के रूप में अनेक नगरों की स्थापना किया था
मुस्लिम कर लिया मध्यकाल 12 01 1700 ईसा पूर्व में प्रसाद की ही उद्देश्य से अपने
नगरों की स्थापना की गई थी तथा बहुत से प्रभावित नगरों का जीव को दर्द की किया गया
इस काल में मुगल शासको में प्रचार केदो तथा प्रादेशिक राजधानियों के रूप में नगरों
के विकास का उल्लेख व्रत में किया था मुगल काल में विकसित नगरों में उत्तर भारत में
दिल्ली इलाज शाहाबाद फतेहपुर सिकरी आगरा बिजोराबाद शाहजहांपुर मुरादाबाद मुगलसराय
लखनऊ जौनपुर आज और दक्षिण भारत में बांग्ला हैदराबाद बताइए तो आज प्रमुख थे आधुनिक
काल 17 से सपनों के बरसात में नागरिक विकास को एक नई दिशा विशेष शासन की अवधि में
मिली इस काल में प्रशंसनिक केंद्र प्रवाहित केंद्र उपस्थित इन औद्योगिकरण केंद्र
समुद्र पाटन या नदी पाटन के रूप में एक नगरों की उत्पत्ति एवं विकास हुआ ग्रामीण
कालीन राजधानी तथा मनोरंजन केंद्र के रूप में नैनीताल शिमला दरजी नगर जैसे पहाड़ी
नगरों का विकास इसी भारत में हुआ भारत बहुत से नगर छावनी केंद्र के रूप में विकसित
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