भारत की समस्त नदियों में गंगा को सर्वेक्षण स्थान प्राप्त है सभ्यता के शुरू होने से ही भारतीयों के हृदय में गंगा के प्रति अखंड श्रद्धा रही है करोड़ों मनुष्य में गंगा के किनारे आश्रय ग्रहण करके अपने को भाग्यशाली कहा है इस प्रकार गंगा नदी की कहानी भारतीय सभ्यता तथा संस्कृत की कहानी है गंगा के मैदान में बड़े-बड़े साम्राज्यों का उधर तथा पतन हुआ है गंगा मनुष्य के ज्ञान सहन त्याग वैराग्य उत्तर चढ़ा विकास पाटन तथा जीवन निरुद्ध की कथा है गंगा की पवन तथा निर्माण धारा से योग युग से मानव के हृदय को उदयाचित किया है उसे आगे बढ़ाने तथा पवित्र होने की प्रेरणा आती है इस प्रकार भारत की आने नदियों की अपेक्षा गंगा नदी के प्रति भारतीयों में असीम प्रेम है भारत में विदेश से अनेक जातियां आई इन्होंने यहां जय पदाजय की तो दुनिया बजाई परंतु गंगा के पावन जल से उसके मन को बदल दिया हमारे पूर्वजों ने नहीं संदर्भ से पूर्व पश्चिम तीर्थ के लिए गंगा तट पर नगरों की स्थापना की हिमालय की तरह जहां गंगा पर्वतों को छोड़कर मैदाने में हरिद्वार प्रयाग वाराणसी कानपुर आदि नगरों को अपनी गोद में बसाए हुए हैंहिमालय क्षेत्र में देवप्रयाग से पश्चिम तथा दक्षिण की ओर बहती हुई गंगा हरिद्वार के समीप मैदान में प्रवेश करती है तथा परंतु दक्षिण तथा दक्षिण पूर्व की ओर बहने लगती है जब गंगा मैदान में आती है तो इसमें अनेक सहायक नदियां मिलती है जिसमें ग्राम गंगा गोमती घाघरा वचन अंगूठी मेरी बागमती कोसी महान नदी आदि हैं जो बाय स्टेट पर ए मिलती है पटना के दक्षिण से आकर इसमें सोन नदी मिल गई है गंगा अपना किस स्थान से आने तक गंगा की अपने धाराएं हो जाती है तो बंगाल की खाड़ी में मिलकर लुप्त हो जाती है गंगा नदी की लंबाई लगभग 2474 किलोमीटर तथा जल ग्रहण क्षेत्र 96700 कमी है ब्रह्मपुत्र को छोड़कर गंगा भारत की सबसे बड़ी नदी है भारत के एक तिहाई भाग में इसका जल ग्रहण क्षेत्र तथा सहायक नदियां हैं गंजे के जल तथा इस क्षेत्र की जालोद भूमि के कारण या क्षेत्र राष्ट्रीय सबसे अधिक संपन्न भूमि भाग बन गया है परंतु भूमि लाभ अभी नहीं उठाया जा रहा है
गंगा नदी से कौन-कौन सी धारा निकलते हैं
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