रजिया के गाड़ी पर बैठने के समय प्रारंभिक इकाइयां क्या थी
उत्तर लगभग जिस समय राजकीय दिल्ली की गाड़ी पर बैठी उसे समय सुल्तान की हालत ठीक नहीं थी उसके सामने अनेक प्रकार उठ खड़े हुए थे इनमें से सबसे बड़ा प्रश्न था राजपूत के विरुद्ध की आशा जहां तक राजपूत संस्थाओं का प्रश्न है वह सदैव अपनी स्वतंत्रता के लिए तोरण के विरुद्ध संघर्ष करते रहे राजकीय के कल संकल्प में एक बार फिर राजपूत राजा से उठने लगे उन्होंने देखा की राजकीय औरत है और इसे शासन करने का तरीका नहीं मालूम है राजकीय की न होने का फायदा राजपूत राजा उठाना चाहते थे दूसरी तरफ चुंगी राजकीय को दिल्ली का सिंहासन टोटके इस फिरोज शाह की हत्या के बाद मिला था इसलिए बहुत से सरदार उसके घर विरोध हो गए थे बदायूं हंसी और लाहौर की खोबेदार राजकीय के गोद विरोध थे भीतर ही भीतर हुए लोग खुद विरोध करना चाहते थे कुछ कुछ बातें बोला था मुसलमान राजकीय का नारी होने के कारण पर्दा ना सेल रहना आवश्यकता समझते थे क्योंकि यह मुस्लिम कानून का स्पष्ट उल्लंघन था एक औरत समाज के सामने मुंह खोलकर शान करें इसे लोग बरदर्शन नहीं कर सकते लेकिन राजकीय भी काम चतुर नहीं थी सबसे बड़ी सावधानी से एक-एक करके सबको पर भूत कर दिया राजकीय के अपवर्तन के कर्म को उल्लेख राजकीय शासन के प्रथम कैसे से निम्नलिखित कारण है राजकीय के निर्गुण सुनीता राजकीय अपने को एक निर्गुण शासन मानती थी राजकीय के द्वारा तक की प्रतिष्ठा में वृद्धि करने तथा अपनी शक्ति को निष्कुश्त मनाने के लिए किया गया था टोटके प्रस्थान तो और अमीरों को नागौर गुर्जर आए हुए राजकीय की तुलकर्म को सहन नहीं कर सकते इसलिए उन्होंने राज्य के विरुद्ध द पंच चंद्र किया फ्री राज्य का त्याग भारतीय राज्य का समय स्त्रियों की परंपरा का युक्त था स्त्री कोघर की सजा माना जाता था किंतु राज किया ने इन प्रचलित स्थान को छोड़ दिया था वह पढ़ता नहीं करती थी पुरुषों के समान घोड़े पर सवार होकर युद्ध में पहुंचती थी इस इस्लाम के कट्ठा समस्त संकल्प विचारों के अमीरों ने राजकीय की इन बातों का विरोध किया और वह अपने विरोध में रसिया को गए
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